संस्थापक प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

संस्थापक प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह जी की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
मिहरावां। सहकारी पी.जी कॉलेज मिहरावां के संस्थापक प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह जी की पुण्यतिथि पर बुधवार को महाविद्यालय परिसर में भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय एवं इंटर कॉलेज परिवार के शिक्षकों, प्रबंध समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने संस्थापक प्राचार्य के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा संस्था की स्थापना एवं शैक्षणिक विकास में उनके योगदान को स्मरण करते हुए उनसे जुड़ी अपनी स्मृतियाँ साझा कीं।
कार्यक्रम में वर्तमान में सहकारी पी.जी कॉलेज मिहरावां एवं इंटर कॉलेज के प्रबंधक तथा संस्थापक प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह जी के सुपुत्र श्री राजीव कुमार सिंह जी ने अपने पिता के चित्र पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने अपने पिता से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि डॉ. समर बहादुर सिंह जी उनके लिए केवल पिता ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रथम शिक्षक, मार्गदर्शक और संस्कारों के स्रोत थे। उनके व्यक्तित्व, अनुशासन, शिक्षा के प्रति समर्पण तथा विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशीलता की स्मृतियाँ आज भी उनके जीवन को दिशा देती हैं।
श्री राजीव कुमार सिंह जी ने कहा कि पिता की स्मृतियाँ जीवन की ऐसी धरोहर हैं, जिन्हें समय कभी धुंधला नहीं कर सकता। डॉ. समर बहादुर सिंह जी शिक्षा को समाज और नई पीढ़ी के निर्माण का माध्यम मानते थे। संस्था के विकास, विद्यार्थियों के हित और शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ बनाने के लिए उन्होंने सदैव समर्पण के साथ कार्य किया। उन्होंने कहा कि एक पुत्र के रूप में पिता की स्मृतियाँ उनके लिए भावनात्मक धरोहर हैं, वहीं वर्तमान में महाविद्यालय एवं इंटर कॉलेज के प्रबंधक के रूप में उनके द्वारा स्थापित शैक्षणिक मूल्यों और संस्थागत परंपराओं को आगे बढ़ाना उनके लिए गौरव के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण दायित्व भी है। उन्होंने कहा कि डॉ. समर बहादुर सिंह जी की सबसे बड़ी विरासत केवल संस्था का निर्माण नहीं, बल्कि वह शैक्षणिक संस्कार, अनुशासन और सेवा-भाव है, जिसे उन्होंने अपने कार्यों से स्थापित किया। आज संस्था को आगे बढ़ते हुए देखना उनके सपनों और परिश्रम की निरंतरता का प्रमाण है। उनके आदर्शों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिंह जी ने संस्थापक प्राचार्य को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. समर बहादुर सिंह जी ने महाविद्यालय की नींव मजबूत शैक्षणिक मूल्यों के साथ रखी। उन्होंने संस्था के निर्माण के साथ विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी। उनके द्वारा स्थापित परंपराएँ आज भी महाविद्यालय को दिशा प्रदान कर रही हैं। प्रबंध समिति के सदस्य श्री कमलेश राय जी ने संस्थापक प्राचार्य के साथ जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए उनके सरल, कर्मठ, अनुशासित एवं संवेदनशील व्यक्तित्व को याद किया। उन्होंने कहा कि डॉ. समर बहादुर सिंह जी का जीवन शिक्षा और संस्था के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल रहा।इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य श्री शिव शंकर यादव जी, वर्तमान प्रधानाचार्य डॉ. आर.डी. सिंह जी तथा डिग्री कॉलेज के प्राचार्य
डॉ. अरविंद कुमार सिंह जी ने भी संस्थापक प्राचार्य के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. समर बहादुर सिंह जी ने संस्था को एक मजबूत शैक्षणिक आधार प्रदान किया और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सदैव महत्व दिया। उनके विचार और कार्य आज भी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।
कार्यक्रम का संचालन श्री ओम प्रकाश सिंह जी ने किया। उन्होंने संस्थापक प्राचार्य के जीवन, शिक्षा के प्रति उनके समर्पण तथा संस्था के निर्माण में उनके योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके द्वारा स्थापित आदर्श महाविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा में सदैव मार्गदर्शक बने रहेंगे।इस अवसर पर इंटर कॉलेज एवं डिग्री कॉलेज के समस्त उपलब्ध शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने संस्थापक प्राचार्य के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त की तथा उनके व्यक्तित्व एवं योगदान को स्मरण किया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान वातावरण भावपूर्ण रहा। उपस्थित लोगों ने अपने संस्मरणों के माध्यम से संस्थापक प्राचार्य के जीवन और योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि किसी संस्थापक का वास्तविक स्मारक केवल कोई भवन नहीं, बल्कि वह संस्था, उसकी शैक्षणिक परंपरा और उससे शिक्षा प्राप्त कर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाली पीढ़ियाँ होती हैं। डॉ. समर बहादुर सिंह जी द्वारा स्थापित शैक्षणिक मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

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