दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ने ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन और सहकारी बैंकिंग की भूमिका को विकसित भारत @2047 समापन समारोह

*सहकारी स्नातकोत्तर महाविद्यालय मिहरावां, जौनपुर में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन*
द्वितीय दिवस : समापन समारोह
द्वितीय दिवस में समापन समारोह 02:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक आयोजित किया गया।
समापन समारोह में महाविद्यालय के प्रबंधक श्री राजीव कुमार सिंह, मुख्य अतिथि डॉ० हर्षमणि सिंह, प्रोफेसर राकेश यादव, डॉ० रामदत्त सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने वित्तीय समावेशन को ग्रामीण आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए सहकारी बैंकों को अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुख बनाने पर बल दिया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ० अरविंद कुमार सिंह ने संगोष्ठी की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को समसामयिक विषयों पर शोध एवं विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ० राज बहादुर यादव ने किया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ० विकास सिंह, आयोजन सचिव डॉ० रणधीर कुमार, सह-संयोजक श्री नीरज कुमार सिंह एवं डॉ० मनोज सोनकर ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संगोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी शोधार्थियों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों से फीडबैक फॉर्म भरने का अनुरोध किया गया। उनसे कहा गया कि “आपका सुझाव हमें आगे भी मार्गदर्शन देता रहेगा” और उनके सुझाव भविष्य में आयोजित होने वाले अकादमिक कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने में सहायक होंगे।
दो दिवसीय संगोष्ठी में महाविद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं, कर्मचारी, इंटर कॉलेज के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को सफल एवं गरिमापूर्ण बनाया।
अंत में डॉ० रणधीर कुमार ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, प्राचार्य, सभी शोध-पत्र प्रस्तुतकर्ताओं, शोधार्थियों, प्रतिभागियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
संगोष्ठी का निष्कर्ष
दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ने ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन और सहकारी बैंकिंग की भूमिका को विकसित भारत @2047 के व्यापक लक्ष्य से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण अकादमिक विमर्श प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र से लेकर तकनीकी सत्रों और समापन समारोह तक विषय के आर्थिक, सामाजिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर विचार-विमर्श हुआ। शोध-पत्र प्रस्तुतियों ने संगोष्ठी को शोधपरक आधार प्रदान किया, जबकि विशेषज्ञों के विचारों ने ग्रामीण वित्तीय समावेशन को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं को रेखांकित किया।
इस प्रकार सहकारी पी०जी० कॉलेज मिहरावां जौनपुर में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी ज्ञान, शोध, संवाद और वित्तीय समावेशन के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने वाला सफल अकादमिक आयोजन सिद्ध हुई।

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